Afeem Ki Kheti :काला सोना की खेती से करे बम्पर कमाई

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका upagriculture के नई पोस्ट अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) में आज के इस पोस्ट के माध्यम से हम आपकोअफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) के बारे में बताएंगे यदि आप भीअफीम की खेती  करना चाहते हैं तो इस ब्लॉग को अंत तक अवश्य पढ़े |

अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) 

Table of Contents

अफीम एक ऐसी फसल होती है जिसकी खेती भारत के लगभग सभी किसान करना चाहते हैं क्योंकि अफीम की खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद खेती होती है अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) करके किसान काफी मात्रा में मुनाफा कमा सकते हैं परंतु अफीम की खेती करने से पहले आपको सरकारी लाइसेंस की आवश्यकता पड़ती है |

अफीम की खेती के बारे में आप लोगों ने तो सुना ही होगा यह वही अफीम होता है जिसका उपयोग आमतौर पर नशे के रूप में किया जाता है और अफीम का उपयोग विभिन्न प्रकार की दवाइयां को बनाने में भी किया जाता है ऐसे में अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) करना काफी लाभदायक होता है परंतु भारत में अफीम की खेती करना कानूनी तौर पर वैध है लेकिन यदि आप इसकी  खेती करना चाहते हैं |

तो इसके लिए आपको सरकार से लाइसेंस प्राप्त करना होगा क्योंकि बिना लाइसेंस के आप इसकी खेती नहीं कर सकते हैं क्योंकि आमतौर पर लोग इसका इस्तेमाल नशे के रूप में करते हैं जिस कारण से बिना लाइसेंस के अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) करना कानूनी रूप से अपराध है यदि आप बिना लाइसेंस के अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) करते हैं तो आपको कड़ी से कड़ी सजा मिल सकती है अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकती है |

क्योंकि अफीम की खेती से काफी अच्छे मात्रा में मुनाफा कमाया जा सकता है अफीम की खेती करने के लिए भारत सरकार द्वारा बनाए गए नियमों और शर्तों का पालन करना होगा और यदि आपके पास अफीम की खेती करने का लाइसेंस प्राप्त है तभी इसके बीज़ भी आपको मिलेगा यदि आपके पास लाइसेंस नहीं है तो अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) करने के लिए आपके बीज नहीं मिलेगा तो आईए जानते हैं अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) के लिए लाइसेंस कैसे और कहां से प्राप्त करें और अफीम की खेती कैसे करें |

अफीम की खेती के लिए लाइसेंस वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है परंतु यह लाइसेंस सभी जगह के लिए नहीं मिलता है क्योंकि अफीम की खेती भारत में कुछ चुनिंदा स्थानों पर ही किए जाते हैं इतना ही नहीं आप अफीम की खेती किस मिट्टी में करेंगे या फिर सरकार द्वारा तय किया जाता है अफीम की खेती और खेती करने के लिए लाइसेंस कैसे प्राप्त किया जाता है |

सभी जानकारी को प्राप्त करने के लिए  https://narcoticsindia.nic.in/ की वेबसाइट पर विजिट करे और यदि आपको एक बार लाइसेंस मिल जाता है तो आप नारकोटिक्स विभाग से अफीम की खेती के लिए बीज प्राप्त कर सकते हैं |

अफीम की खेती के लिए उपयुक्त जलवायु (Suitable climate for Afeem Ki Kheti )

अफीम की खेती करने के लिए समशीतोष्ण जलवायु की जरूरत होती है और इसके खेती करने के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है इससे अधिक तापमान अफीम की फसल के लिए नुकसानदायक होता है |

अफीम की खेती के लिए उपयुक्त भूमि ( Land suitable for opium cultivation)

अफीम की खेती सभी प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है परंतु यदि आप अफीम की खेती करने के लिए उचित जल निकास एवं पर्याप्त जीवांश पदार्थ वाली मध्यम से गहरी काली मिट्टी जिसका पीएच मान 6.5 से 7 और जिसमें लगभग 5 से 6 साल पहले अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) की गई हो वही भूमि इसके खेती के लिए सबसे अधिक उपयोगी होती है |

अफीम की खेती के लिए खेतों की तैयारी  ( Preparation of fields for Afeem Ki Kheti )

अफीम की खेती करने के लिए सबसे पहले खेतों को अच्छे तरीके से तैयार करना होता है क्योंकि खेतों की तैयारी का महत्वपूर्ण योगदान होता है इसकी खेती करने से पहले दो बार खादी तथा बार तिरछी जुदाई की जाती है और एक एकड़ भूमि में 20 से 25 गाड़ी अच्छे तरीके से सड़ी हुई गोबर की खाद को समान रूप से मिट्टी में मिलने के पश्चात रोटावेटर की सहायता से खेतों की जुताई करके मिट्टी और खाद को आपस में मिलाकर भुरभुरा कर दिया जाता है |

इसके पश्चात  खेतों में पाटा चला कर समतल कर लिया जाता है और फिर 3 से 4 मी की लंबाई और 1 मीटर की चौड़ाई के आकार की क्यारियां तैयार कर ली जाती हैं |

अफीम की खेती करने के लिए प्रमुख किस्मे (Major varieties for opium cultivation )

अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) करने के लिए प्रमुख किस्म उपलब्ध हैं जो की निम्नलिखित है जैसे जवाहर अफीम -16 जवाहर अफीम -540 जवाहर अफीम -539 आदि मध्य प्रदेश के अनुशासित किस्म है

अफीम की खेती के लिए बीज दर तथा उपचार (Seed rate and treatment for Afeem Farming )

यदि आप अफीम की खेती कतर में करते हैं तो 5 से 6 किलोग्राम बीज तथा यदि छिड़काव विधि से बुवाई करते हैं तो 7 से 8 किलो बीज प्रति हेक्टेयर में हो सकता होती है बीजों का उपचार करने के लिए 8 मैटालेक्जिल अथवा 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम + 2 ग्राम मेन्काजेब प्रति किलो बीज के मान से उपचारित करना चाहिए।

अफीम की बुवाई का समय (poppy sowing time )

Afeem Ki Kheti

अफीम की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर महीने का अंत तथा नवंबर महीने के शुरुआती समय होता है |

बुवाई की विधि (sowing method )

अफीम के बीजों की बुवाई 0.25 से 1 सेंटीमीटर गहराई तक करना चाहिए बुवाई करने के लिए 30 सेंटीमीटर कतर से कतर तथा 0.9 सेंटीमीटर पौधे से पौधों के बीच की दूरी रखना चाहिए |

अफीम के पौधों की निराई गुड़ाई तथा छटाई (Weeding and pruning of poppy plants )

अफीम के फसलों की निराई गुड़ाई तथा छटाई की पहली प्रक्रिया बुवाई के लगभग 28 से 30 दिनों के बाद तथा दूसरी प्रक्रिया 38 से 40 दिनों के बाद कट ग्रस्त एवं आवश्यक पौधों को निकलते हुए करना चाहिए और अंतिम छाती लगभग 48 से 50 दिनों के बाद पौधों से पौधों की दूरी और से 10 सेंटीमीटर तथा प्रति हेक्टेयर 3.5 0 से 4.0 लाख पौधे रखते हुए करना चाहिए |

अफीम की खेती में प्रयुक्त खाद और उर्वरक की मात्रा (Amount of manure and fertilizer used in opium cultivation )

अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) से अधिक से अधिक मात्रा में उत्पादन प्राप्त करने के लिए मृदा परीक्षण के आधार पर खाद और उर्वरक की अनुकूल मात्रा का उपयोग करना चाहिए. इसके लिए बरसात के मौसम में खेत में लोबिया अथवा सनई की हरी खाद को तैयार करना चाहिए |

यदि आप किसी कारण वश हरी खाद नहीं तैयार कर पाते हैं तो लगभग 25 से 30 ट्रॉली सड़ी हुई गोबर की खाद को खेतों की तैयारी के समय देना चाहिए सड़ी हुई गोबर की खाद डालने के पश्चात 38 किलोग्राम यूरिया ,सुपर फास्फेट 50 किलोग्राम , म्यूरेट ऑफ़ पोटाश आधा किलोग्राम की मात्रा को खेतों में डाल दे |

अफीम की खेती में फसलों की सिंचाई (Irrigation of crops in Poppy Farming )

अफीम की खेती में यदि हम बात करें फसलों की सिंचाई की तो बुवाई के तुरंत बाद सिंचाई कर देना चाहिए और दूसरी सिंचाई 10 से 12 दिन के पश्चात अंकुरण आने पर करना चाहिए इसके पश्चात 15 से 20 दिनों के अंतर्गत मिट्टी तथा मौसम के अनुसार सिंचाई करते रहना चाहिए काली पुष्प डोडा एवं चीरा लगाने के 5 से 8 दिन पहले सिंचाई करना अत्यधिक आवश्यक होता है |

यदि भूमि भारी है तो चीरा के बाद सिंचाई नहीं करना चाहिए और यदि भूमि हल्की है तो चीरा लगाने के 2 या 3 दिन के पश्चात सिंचाई कर देना चाहिए और यदि आप इसकी सिंचाई ट्रिकल विधि या ड्रिप इरिगेशन विधि  के द्वारा करते हैं तो काफी अच्छा होता है और आपको आशाजनक परिणाम प्राप्त होंगे |

अफीम की खेती से कालाबाजारी ( Black marketing from opium cultivation )

1 हेक्टेयर खेत में लगभग 50 से 60 किलो अफीम का लेटेक्स प्राप्त किया जा सकता है सरकार बहुत का सामान्य कीमत पर इसे खरीदती है अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) करने का लाइसेंस देने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है कि सरकार अफीम का उपयोग कई प्रकार की दवाइयां को बनाने में करती है परंतु यदि आप अफीम को ब्लैक में बेचते हैं तो यह काफी महंगा बिकता है |

क्योंकि काले बाजार में अफीम का कीमत एक से 1 से 1.5 रुपए तक होता है क्योंकि बहुत सारे लोग इसका उपयोग नशे के रूप में करते हैं इसे बेचने के लिए विभिन्न प्रकार के तरीके अपनाए जाते हैं यहां तक की अफीम की खेती (Afeem Ki Kheti ) के बाद जो बेस्ट पदार्थ निकलता है उसे भी सरकारी अधिकारी ले जाते हैं ताकि कोई भी व्यक्ति इसका गलत इस्तेमाल में ना कर सके |

सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में अफीम की खेती कहां होती है ?

भारत में अफीम की खेती मध्य प्रदेश के मंदसौर नीमच और रतलाम में बहुत अधिक मात्रा में किसान अफीम की खेती करते हैं इसकी खेती करने के लिए किसानों को केंद्रीय नारकोटिक्स विभाग से लाइसेंस लेना होता है |

अफीम कितने दिन में उगता है ?

अफीम बुवाई के लगभग 100 से 120 दिन के बाद पौधों में फूल आना प्रारंभ हो जाता है और फूलों के झड़ने के बाद इसमें डोडे लग जाते हैं डोडो से ही अफीम की हार्वेस्टिंग रोज थोड़ी-थोड़ी मात्रा में की जाती है |

अफीम कितने मात्रा में खाना चाहिए ?

प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति को 30 से 35 ग्राम महीने के हिसाब से अफीम खाने चाहिए |

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