परम्परागत कृषि विकास योजना (Paramparagat Krishi Vikas Yojana – PKVY) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका उद्देश्य किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के अंतर्गत जैविक खाद, जैव उर्वरक, जैविक कीट प्रबंधन, प्रशिक्षण, प्रमाणीकरण और कृषि उत्पादों के विपणन जैसी गतिविधियों के लिए सहायता प्रदान की जाती है।
जो किसान रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करके जैविक खेती करना चाहते हैं, उनके लिए यह योजना उपयोगी हो सकती है। उत्तर प्रदेश के किसान भी राज्य सरकार के माध्यम से संचालित योजना के अंतर्गत उपलब्ध अवसरों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इस लेख में जानिए परम्परागत कृषि विकास योजना क्या है, इसके अंतर्गत कितनी आर्थिक सहायता मिलती है, कौन पात्र है और आवेदन करने के लिए क्या करना चाहिए।
परम्परागत कृषि विकास योजना क्या है?
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परम्परागत कृषि विकास योजना को अंग्रेजी में Paramparagat Krishi Vikas Yojana (PKVY) कहा जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2015-16 में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।
यह योजना अब प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) का एक घटक है। इसके अंतर्गत किसानों को समूह या क्लस्टर बनाकर जैविक खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
इस योजना का उद्देश्य केवल जैविक फसल उगाना ही नहीं, बल्कि किसानों को उत्पादन, जैविक प्रमाणीकरण, फसल की गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच बनाने में सहायता देना भी है।

परम्परागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत कितनी सहायता मिलती है?
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की 4 फरवरी 2025 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, PKVY के अंतर्गत तीन वर्षों की अवधि के लिए प्रति हेक्टेयर कुल ₹31,500 की सहायता का प्रावधान बताया गया है।
इस सहायता का विवरण निम्नलिखित है:
| सहायता का उद्देश्य | तीन वर्षों के लिए प्रति हेक्टेयर राशि |
| जैविक खाद एवं अन्य जैविक इनपुट | ₹15,000 |
| विपणन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं मूल्य संवर्धन | ₹4,500 |
| जैविक प्रमाणीकरण एवं अवशेष विश्लेषण | ₹3,000 |
| प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण | ₹9,000 |
| कुल सहायता | ₹31,500 |
महत्वपूर्ण: यह सहायता तीन वर्षों की अवधि के लिए है, न कि हर साल ₹31,500। ₹15,000 की जैविक इनपुट सहायता किसानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। बाकी सहायता निर्धारित योजना गतिविधियों के लिए होती है।
वास्तविक लाभ, पात्रता और सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया राज्य में स्वीकृत कार्यक्रम, चयनित क्लस्टर और लागू दिशा-निर्देशों पर निर्भर करती है।
परम्परागत कृषि विकास योजना के उद्देश्य
इस योजना के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
- रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने में सहायता देना।
- जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और जैव उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देना।
- मिट्टी की सेहत और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्रोत्साहित करना।
- किसानों को जैविक खेती का प्रशिक्षण देना।
- जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण और गुणवत्ता जांच में सहायता करना।
- किसानों को जैविक उत्पादों की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन में सहयोग देना।
- किसानों के समूह बनाकर जैविक उत्पादों की बेहतर आपूर्ति व्यवस्था विकसित करना।
परम्परागत कृषि विकास योजना के लाभ
- जैविक खेती के लिए आर्थिक सहायता
योजना के अंतर्गत निर्धारित नियमों के अनुसार जैविक इनपुट खरीदने या तैयार करने के लिए सहायता मिल सकती है। इससे किसानों को जैविक खेती की शुरुआत करने में मदद मिलती है।
- जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा
किसान गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य स्वीकृत जैविक इनपुट का उपयोग करके फसल उत्पादन की ऐसी प्रणाली विकसित कर सकते हैं, जिसमें मिट्टी की सेहत पर ध्यान दिया जाता है।
- प्रशिक्षण की सुविधा
जैविक खेती अपनाने वाले किसानों को प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे जैविक खाद तैयार करने, फसल प्रबंधन और जैविक खेती की प्रक्रियाओं को समझने में मदद मिलती है।
- जैविक प्रमाणीकरण में सहायता
जैविक उत्पादों की पहचान और विश्वसनीयता के लिए प्रमाणीकरण महत्वपूर्ण है। योजना में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार प्रमाणीकरण और अवशेष विश्लेषण से संबंधित सहायता का प्रावधान है।
- उत्पादों की बिक्री में सहयोग
योजना में पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन और विपणन से जुड़ी गतिविधियों के लिए भी सहायता निर्धारित है। इससे किसानों को अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की बेहतर व्यवस्था बनाने में मदद मिल सकती है।
ध्यान रखें कि जैविक उत्पादों के लिए अधिक कीमत मिलना सुनिश्चित नहीं है। इसका लाभ स्थानीय बाजार, उत्पाद की गुणवत्ता, प्रमाणन और खरीदारों की मांग पर निर्भर करता है।
परम्परागत कृषि विकास योजना के लिए कौन पात्र हो सकता है?
योजना का प्रमुख फोकस जैविक खेती करने वाले किसानों के समूहों और क्लस्टरों पर है। छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया जाता है।
सामान्य रूप से निम्नलिखित किसान योजना से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं:
- जैविक खेती अपनाने के इच्छुक किसान।
- पहले से जैविक खेती कर रहे किसान।
- किसान समूहों और निर्धारित क्लस्टरों से जुड़े किसान।
- जैविक खेती के लिए निर्धारित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होने के इच्छुक किसान।
हालांकि, केवल किसान होना या जमीन का मालिक होना अपने आप आर्थिक सहायता पाने की गारंटी नहीं है। संबंधित क्लस्टर, राज्य के लक्ष्य, चयन प्रक्रिया और लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्रता की पुष्टि करना जरूरी है।
परम्परागत कृषि विकास योजना में आवेदन कैसे करें?
इस योजना के लिए आवेदन और किसान चयन की प्रक्रिया राज्य सरकार के माध्यम से संचालित होती है। इसलिए उत्तर प्रदेश के किसानों को निम्नलिखित प्रक्रिया अपनानी चाहिए।
चरण 1: नजदीकी कृषि विभाग से संपर्क करें
अपने जिले के कृषि विभाग कार्यालय या विकासखंड में तैनात कृषि विभाग के अधिकारी से संपर्क करके पूछें कि आपके क्षेत्र में PKVY के अंतर्गत जैविक खेती का कोई सक्रिय क्लस्टर या कार्यक्रम संचालित हो रहा है या नहीं।
चरण 2: पात्रता की जानकारी लें
अधिकारी से पता करें कि आपके गांव या क्षेत्र के किसान इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं या नहीं। साथ ही यह भी पूछें कि किसान समूह में शामिल होना आवश्यक है या कोई अन्य चयन प्रक्रिया लागू है।
चरण 3: आवश्यक दस्तावेज तैयार करें
राज्य और कार्यक्रम के निर्देशों के अनुसार जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।
चरण 4: आवेदन या किसान समूह में पंजीकरण कराएं
संबंधित कृषि अधिकारी द्वारा बताई गई प्रक्रिया के अनुसार आवेदन करें या निर्धारित किसान समूह/क्लस्टर में शामिल होने के लिए पंजीकरण कराएं।
चरण 5: आवेदन की स्थिति और आगे की प्रक्रिया जानें
आवेदन जमा करने के बाद संबंधित अधिकारी से चयन, प्रशिक्षण, सत्यापन और आर्थिक सहायता की प्रक्रिया की जानकारी लें।
ध्यान दें: इस लेख में किसी अपुष्ट वेबसाइट को योजना का आधिकारिक आवेदन पोर्टल नहीं बताया गया है। आवेदन से पहले अपने राज्य के कृषि विभाग से वर्तमान प्रक्रिया की पुष्टि जरूर करें।
आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज लग सकते हैं?
आवश्यक दस्तावेज राज्य और संबंधित कार्यक्रम के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। सामान्य तौर पर निम्नलिखित दस्तावेज तैयार रखना उपयोगी है:
- आधार कार्ड
- बैंक खाते का विवरण
- मोबाइल नंबर
- किसान और कृषि भूमि से संबंधित विवरण
- पासपोर्ट आकार की फोटो, यदि मांगी जाए
- किसान समूह या क्लस्टर से संबंधित विवरण, यदि लागू हो
- राज्य के निर्देशों के अनुसार अन्य आवश्यक दस्तावेज
इन सभी दस्तावेजों को अनिवार्य मानने से पहले संबंधित कृषि विभाग से आधिकारिक सूची प्राप्त कर लें।
उत्तर प्रदेश के किसान योजना की जानकारी कहां से प्राप्त करें?
उत्तर प्रदेश के किसान अपने जिले के कृषि विभाग कार्यालय, विकासखंड कृषि अधिकारी या संबंधित कृषि विभाग के अधिकृत माध्यम से योजना की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
किसानों को विशेष रूप से इन सवालों के जवाब पूछने चाहिए:
- क्या मेरे जिले में PKVY का कार्यक्रम सक्रिय है?
- क्या मेरे गांव में जैविक खेती का क्लस्टर बना हुआ है?
- किसान समूह में शामिल होने की प्रक्रिया क्या है?
- वर्तमान में आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं या नहीं?
- आर्थिक सहायता पाने के लिए क्या शर्तें लागू हैं?
- DBT और अन्य योजना सहायता की स्थिति कैसे जांचें?
योजना की जानकारी के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित नवीनतम सूचनाएं भी देखी जा सकती हैं।
जैविक खेती शुरू करने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
जैविक खेती अपनाने से पहले किसान को अपनी मिट्टी, फसल, पानी की उपलब्धता और बाजार की मांग को समझना चाहिए।
- मिट्टी की जांच कराएं।
- स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से फसल के अनुसार जैविक पोषण प्रबंधन की जानकारी लें।
- जैविक खाद और अन्य इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
- जैविक खेती के प्रमाणीकरण से संबंधित नियम समझें।
- उत्पाद की बिक्री के लिए संभावित बाजार और खरीदारों की जानकारी जुटाएं।
- योजना में मिलने वाली सहायता को निश्चित आय या निश्चित मुनाफा न मानें।
जैविक खेती में बदलाव के दौरान फसल उत्पादन और लागत में अंतर आ सकता है। इसलिए पूरी जमीन पर एक साथ बदलाव करने के बजाय स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर योजना बनाना उपयोगी हो सकता है।
निष्कर्ष
परम्परागत कृषि विकास योजना उन किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है जो जैविक खेती अपनाना चाहते हैं और इसके लिए प्रशिक्षण, जैविक इनपुट, प्रमाणीकरण तथा विपणन से संबंधित सहायता प्राप्त करना चाहते हैं।
योजना के अंतर्गत तीन वर्षों के लिए प्रति हेक्टेयर ₹31,500 की सहायता का प्रावधान बताया गया है, जिसमें ₹15,000 जैविक इनपुट के लिए DBT के माध्यम से किसानों को दिए जाने का प्रावधान शामिल है।
उत्तर प्रदेश के किसानों को आवेदन करने से पहले अपने जिले के कृषि विभाग से सक्रिय क्लस्टर, पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और वर्तमान आवेदन प्रक्रिया की पुष्टि करनी चाहिए।
किसान सलाह: योजना की राशि और आवेदन प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है। आवेदन करने से पहले नवीनतम सरकारी दिशा-निर्देश अवश्य जांचें।
सरकारी स्रोत:
- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय / PIB: https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2099756&lang=2®=48
- PIB पर योजना और सहायता का विवरण: https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2100761&lang=2®=48
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
यह भारत सरकार की योजना है, जिसके अंतर्गत क्लस्टर आधारित जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाता है। इसमें जैविक इनपुट, प्रशिक्षण, प्रमाणीकरण और विपणन से जुड़ी गतिविधियों के लिए सहायता का प्रावधान है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की फरवरी 2025 की जानकारी के अनुसार, योजना में तीन वर्षों के लिए ₹31,500 प्रति हेक्टेयर की सहायता का प्रावधान है। इसमें से ₹15,000 प्रति हेक्टेयर जैविक इनपुट के लिए DBT के माध्यम से किसानों को दिए जाने का प्रावधान बताया गया है। वर्तमान कार्यक्रम और पात्रता की पुष्टि राज्य के कृषि विभाग से करें।
PKVY उत्तर प्रदेश सहित पूर्वोत्तर राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए लागू की जाती है। लेकिन किसी विशेष जिले या गांव में लाभ पाने के लिए वर्तमान कार्यक्रम और चयन प्रक्रिया की पुष्टि करना आवश्यक है।
आवेदन की प्रक्रिया राज्य सरकार और संबंधित कार्यक्रम पर निर्भर करती है। उत्तर प्रदेश के किसान अपने कृषि विभाग या विकासखंड कृषि अधिकारी से वर्तमान आवेदन प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करें।
योजना में जैविक प्रमाणीकरण से जुड़ी सहायता का प्रावधान है। प्रमाणन की प्रक्रिया और पात्रता संबंधित कार्यक्रम के नियमों के अनुसार पूरी करनी होती है।
यह फसल, उत्पादन लागत, बाजार की मांग, उत्पाद की गुणवत्ता और बिक्री मूल्य पर निर्भर करता है। जैविक खेती से अधिक मुनाफा मिलने की गारंटी नहीं दी जा सकती।